मैं तुम्हारी प्रतीक्षा में
कंदीले जलाकर बैठा हूँ
अंधियारे में एक
चिंगारी जमाये बैठा हूँ
पाज़ेब खनखना रही हैं
की तुम आसपास हो
क्या माजरा है ऋतम्भरा
जो तुम स्याह रात हो
सिलसिले तो रोज है
हम मिले तो नई बात हो
गर तुम हो अँधेरे में
तो अब अँधेरे में हर रात हो
उम्मीद है मुझे तुम मिलोगी
ये जुगनुओ से मेरी बात है
में तुम्हारी प्रतीक्षा में हूँ
क्योकि तु , मेरी आखरी मुहोब्बत है
क्योकि तु , मेरी आखरी मुहोब्बत है
wow....wow...wow
ReplyDeleteThanks
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