Wednesday, 16 August 2017

मैं तुम्हारी प्रतीक्षा में

मैं तुम्हारी प्रतीक्षा में
कंदीले जलाकर बैठा हूँ 

अंधियारे में एक 
चिंगारी जमाये बैठा हूँ 

पाज़ेब  खनखना रही हैं 
की तुम आसपास हो 

क्या माजरा है  ऋतम्भरा 
जो तुम स्याह रात हो 

सिलसिले तो रोज है 
हम मिले तो नई  बात हो 

गर तुम हो अँधेरे में 
तो अब अँधेरे में हर रात हो 

उम्मीद है मुझे तुम मिलोगी 
ये जुगनुओ से मेरी बात है 

में तुम्हारी प्रतीक्षा में हूँ
क्योकि तु , मेरी आखरी मुहोब्बत है 

Monday, 7 August 2017

भवरें का फुलों से आखरी स्पंदन है

फुलों के मुरझाते हुए पुष्पंद से
भवरें का ये आखरी स्पंदन है|
ये आखरी मिलन ,आखरी जीवन
आखरी क्षण है|

यूँ तो कई समर हुए है ,
जीवन की गति देखकर ,
पर हर समर में उसकी आखरी मुहोब्बत ,
उसकी आखरी चूभन है|

तूफानी शहतीरों को ताक में रखकर ,
आँधियों की महफ़िलों को राख में करकर ,
वो चूमकर ले आता था ,
खुश्बुओ को पुष्प से|

आज  उसका आखरी मिलन , आखरी जीवन ,
आखरी क्षण है|
भवरे का फूलों से आखरी स्पंदन है|

उस और को ना मूड जाना ऐ पुष्प ,
जहा से तेरा आखरी दृश्य नहीं ,
आखरी परिचय , आखरी लक्ष्य नहीं
ये भवरे का आखरी जाम ही ,
 उसका आखरी वंदन है|

मुरझाते हुए फूलों से ,
भवरे का ये आखरी स्पंदन है|