आज कल आँखे ज्यादा बोलती है
जो तुम सुन सको , तो सुनो
इशारो में हर राज़ खोलती है
दिल-ए -जुबा बन कर बतियाती है
मृदङ्गिनी सी आवाज़ है
जो तुम समझ सको , तो समझो
आज कल धड़कने भी झूमने लगी है
दिल में बासंती रंग लिए
अब और बदमाश हो गयी है
शाम की घनघोर शांति में
चलते हुए शितिज़ तक जाती है
जो तुम दूर तक आ सको , तो चलो
अब ये ख्याल भी चालाक हो गए है
समझते सब है
फिर भी बेबाक हो गए है
समुद्र सी लहरो के पार
इन ख्यालो में सीपिया बहूत है
जो तुम लूट सको , तो लूट लो
विचारो के पहाड़ो में मै हीरा ढूंढने निकला हु
जो तुम संग आ सको तो चलो
जो तुम सुन सको , तो सुनो
इशारो में हर राज़ खोलती है
दिल-ए -जुबा बन कर बतियाती है
मृदङ्गिनी सी आवाज़ है
जो तुम समझ सको , तो समझो
आज कल धड़कने भी झूमने लगी है
दिल में बासंती रंग लिए
अब और बदमाश हो गयी है
शाम की घनघोर शांति में
चलते हुए शितिज़ तक जाती है
जो तुम दूर तक आ सको , तो चलो
अब ये ख्याल भी चालाक हो गए है
समझते सब है
फिर भी बेबाक हो गए है
समुद्र सी लहरो के पार
इन ख्यालो में सीपिया बहूत है
जो तुम लूट सको , तो लूट लो
विचारो के पहाड़ो में मै हीरा ढूंढने निकला हु
जो तुम संग आ सको तो चलो