Friday, 5 May 2017

मैं हूँ मृदंगिनी

न हूर सी
न फुल सी
न काँच सी
न कंट सी
न चाँद सी
न चंद सी

मैं हूँ मृदंगिनी

अंग-अंग में नाचती
नाचती मैं ताल में
पर न ताल हूँ
न काल हूँ
न किंचितों की हार हूँ

हाँ मैं बेमिसाल हूँ

मैं आज हूँ
मैं कल भी हूँ
मैं सोचती हूँ
तो हर कण में हूँ

न चण्ड सी
न चण्डी सी
प्रचण्ड हु तो तांडव सी
न जीवन सी
न मृत्यु सी

मैं हूँ तो घनघोर आंधी सी

जो शौर्य सी
जो गर्व सी
हाथ थामे तो मर्म सी
घुंघरुओं की छनछनाहट सी

हाँ मैं हूँ मृदंगिनी सी







Thursday, 4 May 2017

बदलते भारत की जीवनी

बदलते भारत की जीवनी
आज कलम उठकर बोलेगी

स्वतंत्रता सेनानियों सी
आज मरघट जम  कर  खोलेगी

कोई वेदना सी कही
कोने में ना छुप  कर रोने देगी

बदलते भारत  की जीवनी
कलम उठकर बोलेगी

चंडी सा प्रताप लिये
रक्तबीज को खोलेगी

कही जीवन का निश्चय किये
अभिमान को भी तोड़ेगी

उभरते स्वरुप में
आज भारत माँ भी बोलेगी

बदलते भारत की जीवनी
कलम उठकर बोलेगी

करुणामयी माता सी
झुक झुक कर प्रेम लुटाएगी

ये भारत माँ की लाली
चंद लम्हो में न सिमटेगी

इंकलाब से शब्दों की
गठरी भी वो खोलेगी

भारत माँ की जीवनी
आज कलम उठ -उठकर बोलेगी