Friday, 5 May 2017

मैं हूँ मृदंगिनी

न हूर सी
न फुल सी
न काँच सी
न कंट सी
न चाँद सी
न चंद सी

मैं हूँ मृदंगिनी

अंग-अंग में नाचती
नाचती मैं ताल में
पर न ताल हूँ
न काल हूँ
न किंचितों की हार हूँ

हाँ मैं बेमिसाल हूँ

मैं आज हूँ
मैं कल भी हूँ
मैं सोचती हूँ
तो हर कण में हूँ

न चण्ड सी
न चण्डी सी
प्रचण्ड हु तो तांडव सी
न जीवन सी
न मृत्यु सी

मैं हूँ तो घनघोर आंधी सी

जो शौर्य सी
जो गर्व सी
हाथ थामे तो मर्म सी
घुंघरुओं की छनछनाहट सी

हाँ मैं हूँ मृदंगिनी सी







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