न हूर सी
न फुल सी
न काँच सी
न कंट सी
न चाँद सी
न चंद सी
मैं हूँ मृदंगिनी
अंग-अंग में नाचती
नाचती मैं ताल में
पर न ताल हूँ
न काल हूँ
न किंचितों की हार हूँ
हाँ मैं बेमिसाल हूँ
मैं आज हूँ
मैं कल भी हूँ
मैं सोचती हूँ
तो हर कण में हूँ
न चण्ड सी
न चण्डी सी
प्रचण्ड हु तो तांडव सी
न जीवन सी
न मृत्यु सी
मैं हूँ तो घनघोर आंधी सी
जो शौर्य सी
जो गर्व सी
हाथ थामे तो मर्म सी
घुंघरुओं की छनछनाहट सी
हाँ मैं हूँ मृदंगिनी सी
न फुल सी
न काँच सी
न कंट सी
न चाँद सी
न चंद सी
मैं हूँ मृदंगिनी
अंग-अंग में नाचती
नाचती मैं ताल में
पर न ताल हूँ
न काल हूँ
न किंचितों की हार हूँ
हाँ मैं बेमिसाल हूँ
मैं आज हूँ
मैं कल भी हूँ
मैं सोचती हूँ
तो हर कण में हूँ
न चण्ड सी
न चण्डी सी
प्रचण्ड हु तो तांडव सी
न जीवन सी
न मृत्यु सी
मैं हूँ तो घनघोर आंधी सी
जो शौर्य सी
जो गर्व सी
हाथ थामे तो मर्म सी
घुंघरुओं की छनछनाहट सी
हाँ मैं हूँ मृदंगिनी सी
Mast h.. u are real creative.. awesome 🤗🙌
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