Sunday, 20 September 2015

Yaado ki Kitab me mai aksar kho jata hu

तेरी यादों की एक किताब है
जिनमें अक्सर खो जाता हूँ

तू बूंद सी दिखाई देती है 
पर सागर में मैं समां जाता हूँ
तू बादलों सी गडग़ड़ा भी उठती है 
मैं धरती सा मुस्कुरा भी देता हूँ 

तू समुद्र सी लहर तूफ़ान की  
में कोई नाव लिए जाता हूँ 
पहुँचता न किनारों तक 
अब और ज्यादा हात चलाता हुँ 

कुछ पाता हूँ , कुछ खोता हूँ  
इन अँधेरी यादों  में दिया जलाता हूँ 
तेरी यादों की किताब में मैं अक्सर खो जाता हूँ

चित्र बना अब तेरा
जीवन भरना चाहता हूँ 
कुछ सुरीले शब्दों में
तुझ गीत नया सा लिखता हूँ 

अब हवा सी तू चलती है
में किसी पेड़ सा झड़ता हूँ
बारिश सी तू मचलती है
में रूप नया सा गढ़ता हूँ

कभी रूप में आता हु, कभी जाता हूँ
तेरी यादों की किताब में मैं अक्सर खो जाता हूँ 

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