तेरी यादों की एक किताब है
अब हवा सी तू चलती है
में किसी पेड़ सा झड़ता हूँ
बारिश सी तू मचलती है
में रूप नया सा गढ़ता हूँ
कभी रूप में आता हु, कभी जाता हूँ
तेरी यादों की किताब में मैं अक्सर खो जाता हूँ
जिनमें अक्सर खो जाता हूँ
तू बूंद सी दिखाई देती है
पर सागर में मैं समां जाता हूँ
तू बादलों सी गडग़ड़ा भी उठती है
तू बादलों सी गडग़ड़ा भी उठती है
मैं धरती सा मुस्कुरा भी देता हूँ
तू समुद्र सी लहर तूफ़ान की
में कोई नाव लिए जाता हूँ
पहुँचता न किनारों तक
अब और ज्यादा हात चलाता हुँ
कुछ पाता हूँ , कुछ खोता हूँ
इन अँधेरी यादों में दिया जलाता हूँ
तेरी यादों की किताब में मैं अक्सर खो जाता हूँ
चित्र बना अब तेरा
जीवन भरना चाहता हूँ
चित्र बना अब तेरा
जीवन भरना चाहता हूँ
कुछ सुरीले शब्दों में
तुझ गीत नया सा लिखता हूँ
तुझ गीत नया सा लिखता हूँ
अब हवा सी तू चलती है
में किसी पेड़ सा झड़ता हूँ
बारिश सी तू मचलती है
में रूप नया सा गढ़ता हूँ
कभी रूप में आता हु, कभी जाता हूँ
तेरी यादों की किताब में मैं अक्सर खो जाता हूँ
Wow nicely written by Arpit 👍
ReplyDeleteThanks Amit
DeleteThis is very beautifully written. Love the choice of your words throughout your writings. Keep them coming.
ReplyDeleteThank you sir
DeleteBeautifully written..
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