Thursday, 2 February 2017

भीच ले जाय ,खीच ले जाय

भीच ले जाय ,खीच  ले जाय
हर उम्मीद को सींच ले जाय

दीवारों की टहनियों से जो मुलाकात हो जाय
तो बचपन की गिलहरियों को मीत ले जाय

हवा से शीत ले जाय
बहारो से गीत ले जाय

हो सके तो शब्दो से कशिश भी ले जाय

और अगर जा सके तो
चाँद से रौशनी भी  ले जाय 

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