ए ऋतमभरा तुम अभी भी वही खड़ी हो
साथ चलने का वादा था
उस तालाब किनारे पर
अब तो चाँद भी शफक पर आ गया
पानी की गहराइयो में गहरा गया
में अकेले बैठा समा में थम रहा हु
जाने कैसे बर्फ सा जम रहा हु
और अभी भी तुम वही खड़ी हो
साथ चलने का वादा था
उस तालाब किनारे पर
अब तो चाँद भी शफक पर आ गया
पानी की गहराइयो में गहरा गया
में अकेले बैठा समा में थम रहा हु
जाने कैसे बर्फ सा जम रहा हु
और अभी भी तुम वही खड़ी हो
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